बेंच-डेस्क घोटाला: बिहार शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की नई कड़ी

बेंच-डेस्क घोटाला: बिहार शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की नई कड़ी

श्रेणी: प्रशासन | शिक्षक समाज बिहार

✍️ R. B. RAJ

बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। मोतिहारी जिले में बेंच-डेस्क, समरसेबल बोरिंग, बूथ रिपेयरिंग जैसी योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद शिक्षा मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। इस घोटाले में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) संजय कुमार के साथ वर्तमान DEO संजीव कुमार की संलिप्तता की भी चर्चा हो रही है।

क्या है पूरा मामला?

पूर्वी चंपारण जिले में बेंच-डेस्क आपूर्ति, विद्यालयों की मरम्मत, मतदान केंद्रों के रखरखाव, समरसेबल बोरिंग, खेलकूद सामग्री, किचन सेट, चाहरदीवारी और भवन निर्माण जैसी योजनाओं में भारी गड़बड़ियां पाई गई हैं। बिना टेंडर के ही कई ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया, लेकिन विद्यालयों को आवश्यक सामग्री नहीं मिली।

तत्कालीन DEO संजय कुमार पर आरोप है कि उन्होंने खुद ठेकेदार बनकर कार्य किया और प्रत्येक विद्यालय में ₹2400 की कुर्सी-बेंच के लिए ₹5000 का भुगतान किया। इसका खुलासा तब हुआ जब 7 जुलाई 2024 को पूर्वी चंपारण में हुई समीक्षा बैठक में कई विधायकों ने इस मुद्दे को उठाया।

शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के निर्देश पर उनके निजी सचिव इश्तेयाक अजमल ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जांच का आदेश दिया है। जिलाधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

वर्तमान DEO पर भी सवाल

वर्तमान DEO संजीव कुमार के खिलाफ पहले ही विभागीय कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अब तत्कालीन DEO संजय कुमार पर भी जांच की तलवार लटक रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले में शिक्षा विभाग के कई अन्य अधिकारियों की संलिप्तता भी हो सकती है।

शिक्षक समाज बिहार की प्रतिक्रिया

शिक्षक संगठनों ने इस घोटाले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शिक्षक समाज बिहार के प्रतिनिधियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार का यह सिलसिला बंद होना चाहिए। यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बिहार के शिक्षक संगठनों द्वारा बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

अगले कदम क्या होंगे?

  • तीन सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
  • शिक्षा विभाग के कई और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी।
  • शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

बिहार में शिक्षा सुधार की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन इस तरह के घोटाले पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करते हैं। यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे बिहार के शिक्षा तंत्र की साख पर बुरा असर पड़ेगा।


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