डीपीओ पर 41 हजार जुर्माना: अपीलीय प्राधिकार ने की कड़ी कार्रवाई

डीपीओ पर 41 हजार जुर्माना: अपीलीय प्राधिकार ने की कड़ी कार्रवाई

शिक्षक समाज बिहार | https://biharteacherssociety.blogspot.com
by R.B. Raj

बिहार के शिक्षा क्षेत्र में प्रशासनिक उत्तरदायित्व की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। जिला अपीलीय प्राधिकार के अध्यक्ष पीठासीन पदाधिकारी मिलिंद कुमार सिंहा ने लंबे समय तक अपना पक्ष न रखने के कारण जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) खुशबू पर 41 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना दो अपीलीय मामलों में लगाया गया है और जुर्माना की राशि व्यक्तिगत रूप से भुगतनी होगी। साथ ही, जुर्माना वसूले जाने तक डीपीओ के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का आदेश भी जारी किया गया है।


मुख्य बिंदु:

1. जुर्माना का आदेश

  • डीपीओ पर 41 हजार रुपए का जुर्माना:
    • जिला अपीलीय प्राधिकार ने डीपीओ के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का आदेश दिया है जब तक जुर्माना वसूला नहीं जाता।
    • यह जुर्माना दो अलग-अलग अपीलीय वादों में लगाया गया है।

2. मामले का विवरण:

  • पहला मामला:

    • मध्य विद्यालय, कटरमाला की शिक्षिका रानी कुमारी ने 22 मार्च 2022 को पटना हाईकोर्ट के आदेशानुसार डीपीओ के समक्ष अपना वाद दायर किया।
    • कोर्ट के निर्देशानुसार वेतन भुगतान के अपील-वाद का निपटारा 3 माह में करने का आदेश था, लेकिन 3 वर्षों में डीपीओ ने न तो वेतन भुगतान किया और न ही कोई जवाब भेजा।
    • इसके परिणामस्वरूप, 11 मार्च को डीपीओ पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
  • दूसरा मामला:

    • प्राथमिक विद्यालय, अमरसा, टोला, कटरमाला की पंचायत शिक्षिका राजीव कुमार ने 22 मार्च 2022 को हाईकोर्ट के आदेश पर अपना वाद दायर किया, जिसमें उनके वेतन भुगतान के वाद का 3 माह में निपटारा करने का निर्देश था।
    • डीपीओ ने तीन साल के दौरान न तो कोई जवाब दिया और न ही वेतन भुगतान किया।
    • इस मामले में, 11 मार्च को डीपीओ पर 21 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।

3. प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता:

  • स्मार पत्र और शो-कॉज के बाद भी डीपीओ की लापरवाही:
    • प्राधिकार ने डीपीओ को कई बार स्मार पत्र और शो-कॉज भेजे, लेकिन डीपीओ ने कोई उपयुक्त जवाब नहीं दिया।
    • इस कारण डीपीओ पर जुर्माना लगाया गया और आवश्यक विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है।

निष्कर्ष:

इस कड़ी कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि बिहार में शिक्षा क्षेत्र में प्रशासनिक जिम्मेदारियों को गंभीरता से लिया जा रहा है। ऐसे मामले दिखाते हैं कि जो अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। शिक्षक समाज बिहार इस बात पर जोर देता है कि सभी संबंधित अधिकारी और शिक्षक मिलकर इस दिशा में जागरूकता फैलाएं, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो सके।


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यह लेख उन सभी शिक्षकों और शिक्षा संबंधी हितधारकों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है, जो अपने कर्तव्यों के प्रति सजग हैं और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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