आकस्मिक अवकाश और अदेय छुट्टी का नियम
आकस्मिक अवकाश और अदेय छुट्टी का नियम
सरकारी सेवकों के लिए अवकाश संबंधी नियमों का निर्धारण बिहार सेवा संहिता के तहत किया गया है। इसमें आकस्मिक छुट्टी (Casual Leave) और अदेय छुट्टी (Leave Not Due) के प्रावधान स्पष्ट रूप से बताए गए हैं।
1. आकस्मिक छुट्टी (Casual Leave)
बिहार सेवा संहिता के नियम 168 के अनुसार, आकस्मिक छुट्टी एक विशेष प्रकार की छुट्टी है, जिसे नियमित अवकाश की श्रेणी में नहीं गिना जाता। यह सरकारी सेवकों को कुछ दिनों के लिए कर्तव्य से अनुपस्थित रहने की अनुमति प्रदान करता है, लेकिन इसे औपचारिक रूप से छुट्टी नहीं माना जाता।
मुख्य बिंदु:
✅ वेतन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता: चूंकि यह नियमित छुट्टी के दायरे में नहीं आती, इसलिए आकस्मिक छुट्टी लेने पर सरकारी सेवक का वेतन नहीं कटता।
✅ फर्जी अनुपस्थिति से बचाव: यदि इस छुट्टी के कारण सरकारी कार्य प्रभावित होता है, तो छुट्टी देने और लेने वाले दोनों अधिकारी उत्तरदायी माने जाएंगे।
✅ विशेष परिस्थितियों में स्वीकृति आवश्यक: आकस्मिक छुट्टी इस प्रकार नहीं दी जानी चाहिए कि इससे –
- वेतन और भत्तों की गणना प्रभावित हो।
- पदभार ग्रहण या त्याग की प्रक्रिया बाधित हो।
- अवकाश की अवधि अनुमत सीमा से अधिक हो।
अवधि और सीमाएँ:
▶ एक वर्ष में अधिकतम 18 दिन की आकस्मिक छुट्टी अनुमत है।
▶ इसे किसी भी अन्य प्रकार की छुट्टी (विश्रामावकाश आदि) के साथ नहीं जोड़ा जा सकता।
▶ यदि कोई सरकारी सेवक किसी धार्मिक त्योहार को मनाना चाहता है, तो उसे आकस्मिक छुट्टी लेने की अनुमति दी जा सकती है।
▶ किसी विशेष परिस्थिति में 16 दिनों से अधिक छुट्टी देने पर संबंधित अधिकारी को अपने वरिष्ठ अधिकारी को सूचित करना आवश्यक होगा।
विशेष नियम:
🔹 रविवार एवं स्थानीय अवकाश को आकस्मिक छुट्टी से जोड़ा जा सकता है, लेकिन कुल अवधि 12 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
🔹 आकस्मिक छुट्टी का कोई कानूनी दावा नहीं किया जा सकता। यह केवल अधिकतम सीमा का निर्धारण करता है और राज्य सरकार इसे स्वीकृत करने के लिए संबंधित अधिकारियों को विवेकाधिकार देती है।
🔹 सरकारी सेवक को छुट्टी के दौरान अपना पता उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
2. अदेय छुट्टी (Leave Not Due)
अदेय छुट्टी, सरकारी सेवा में विशेष परिस्थितियों में दी जाती है और इसे आधे वेतन पर अनुमोदित किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
✅ यह स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के आधार पर ही दी जा सकती है।
✅ अधिकतम सीमा:
- उत्कृष्ट सेवा के लिए 180 दिन (गजेटेड पदाधिकारी के लिए)।
- निचली सेवाओं के लिए 120 दिन।
✅ अदेय छुट्टी का उपयोग केवल तभी किया जा सकता है, जब अधिकारी इस बात से संतुष्ट हो कि सरकारी सेवक भविष्य में कर्तव्य पर लौटेगा और उतनी ही अवधि की आधे वेतन पर छुट्टी अर्जित करेगा।
विशेष नियम
🔹 यदि किसी सरकारी सेवक को अदेय छुट्टी दी गई हो और वह स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति का आवेदन करे, तो उसकी सेवानिवृत्ति की तिथि छुट्टी प्रारंभ होने की तिथि से मानी जाएगी।
🔹 अदेय छुट्टी पर जाने वाले सरकारी सेवक को वेतन के आधे भाग के बराबर छुट्टी वेतन मिलेगा।
(संदर्भ: बिहार सेवा संहिता - नियम 179(क), 235, 248(ख))
निष्कर्ष:
▶ आकस्मिक छुट्टी को नियमित अवकाश नहीं माना जाता, और यह अधिकतम 18 दिन प्रति वर्ष तक अनुमत है।
▶ अदेय छुट्टी विशेष परिस्थितियों में आधे वेतन पर दी जाती है और यह 180 दिन (उच्च पदों के लिए) तथा 120 दिन (निचले पदों के लिए) तक सीमित होती है।
▶ इन छुट्टियों का उद्देश्य सरकारी सेवकों को कार्यस्थल की जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायता प्रदान करना है।
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