चालाक व्यापारी की बेटी

चालाक व्यापारी की बेटी

एक गाँव में एक व्यापारी रहता था, जिसकी एक सुंदर और बुद्धिमान बेटी थी। व्यापारी ईमानदार था, लेकिन समय के साथ उस पर भारी कर्ज चढ़ गया। यह कर्ज गाँव के एक धूर्त और लालची साहूकार का था, जो इस मौके का फायदा उठाना चाहता था।

षड्यंत्र

जब व्यापारी कर्ज चुकाने में असमर्थ रहा, तो साहूकार ने एक चाल चली। उसने गाँव के लोगों को इकठ्ठा किया और व्यापारी के घर जाकर बोला—
"अगर तुम मेरा कर्ज नहीं चुका सकते, तो अपनी बेटी की शादी मुझसे कर दो!"

व्यापारी असहाय खड़ा रहा, पर उसकी बेटी भीतर से यह सब सुन रही थी। कुछ देर बाद साहूकार ने एक और शर्त रखी—

"मैं एक थैली में एक सफेद और एक काला पत्थर डालूँगा। तुम्हारी बेटी को इनमें से एक पत्थर चुनना होगा।"

  • यदि उसने सफेद पत्थर निकाला, तो कर्ज माफ़ हो जाएगा और शादी की कोई बात नहीं होगी।
  • यदि उसने काला पत्थर निकाला, तो कर्ज माफ़ होगा, लेकिन उसे साहूकार से शादी करनी पड़ेगी।

बुद्धिमत्ता की परीक्षा

लड़की ने देखा कि साहूकार ने धोखे से दोनों काले पत्थर थैली में डाल दिए थे। अब वह असमंजस में थी—

  • यदि वह पत्थर उठाती, तो काला ही निकलता, जिससे उसे उस निर्दयी व्यक्ति से शादी करनी पड़ती।
  • यदि वह इस धोखाधड़ी का खुलासा करती, तो साहूकार क्रोधित होकर उसके पिता से कर्ज़ का दुगना तक वसूल सकता था।

लड़की की चतुराई

लड़की ने बिना हड़बड़ाए थैली में हाथ डाला, एक पत्थर निकाला और जानबूझकर उसे ज़मीन पर गिरा दिया।

"अरे! यह पत्थर तो गिरकर बाकी पत्थरों में मिल गया! अब कैसे पता चलेगा कि मैंने कौन-सा पत्थर उठाया था?"

फिर वह तुरंत बोली—
"कोई बात नहीं, थैली में जो पत्थर बचा है, वही देख लो! अगर वह काला है, तो इसका मतलब मैंने सफेद पत्थर निकाला होगा!"

गाँववालों ने देखा—थैली में केवल काला पत्थर था! इसका मतलब लड़की ने सफेद पत्थर निकाला था।

अंतिम परिणाम

साहूकार का धोखा किसी को समझ में नहीं आया।

  • व्यापारी का कर्ज़ माफ़ हो गया।
  • लड़की को उस लालची आदमी से शादी नहीं करनी पड़ी।
  • गाँववालों ने उसकी चतुराई की प्रशंसा की।

सीख

जब जीवन में कठिन परिस्थितियाँ आएँ और कोई आपका फायदा उठाने की कोशिश करे, तो डरने के बजाय धैर्य और बुद्धिमत्ता से हल निकालें।

"समुद्र की तरह शांत रहो, लेकिन उसकी गहराई जितना ज्ञान रखो!"

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